Jagat Mohan Lal Ravan's Photo'

जगत मोहन लाल रवाँ

1889 - 1934 | लखनऊ, भारत

रुबाई के मशहूर शायर, गौतम बुद्ध पर नज़्म के लिए प्रख्यात

रुबाई के मशहूर शायर, गौतम बुद्ध पर नज़्म के लिए प्रख्यात

ग़ज़ल 11

शेर 12

उस को ख़िज़ाँ के आने का क्या रंज क्या क़लक़

रोते कटा हो जिस को ज़माना बहार का

वो ख़ुश हो के मुझ से ख़फ़ा हो गया

मुझे क्या उमीदें थीं क्या हो गया

पेश तो होगा अदालत में मुक़दमा बे-शक

जुर्म क़ातिल ही के सर हो ये ज़रूरी तो नहीं

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सामने तारीफ़ ग़ीबत में गिला

आप के दिल की सफ़ाई देख ली

तोड़ा है दम अभी अभी बीमार-ए-हिज्र ने

आए मगर हुज़ूर को ताख़ीर हो गई

रुबाई 9

पुस्तकें 5

Jagat Mohan Lal Rawan Aur Unki Shairi

 

1995

नक़्द-ए-रवां

 

 

Rooh-e-Rawan

 

1983

Rubaiyat-e-Rawan

 

2013

Rubaiyat-e-Rawan

 

 

 

चित्र शायरी 1

पेश तो होगा अदालत में मुक़दमा बे-शक जुर्म क़ातिल ही के सर हो ये ज़रूरी तो नहीं

 

ऑडियो 3

'रवाँ' किस को ख़बर उनवान-ए-आग़ाज़-ए-जहाँ क्या था

राह-ओ-रस्म-ए-इब्तिदाई देख ली

वो ख़ुश हो के मुझ से ख़फ़ा हो गया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

 

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