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जावेद नदीम

1958 | मुंबई, भारत

जावेद नदीम

ग़ज़ल 7

नज़्म 25

अशआर 4

जो रहनुमा थे मेरे कहाँ हैं वो नक़्श-ए-पा

मंज़िल पे छोड़ता था जो रस्ता किधर गया

कौन सुनता है यहाँ पस्त-सदाई इतनी

तुम अगर चीख़ के बोलो तो असर भी होगा

ये किस के आसमाँ की हदों में छुपा हूँ मैं

अपनी ज़मीं से उठ के कहाँ गया हूँ मैं

इक इक दिन तो मुसख़्ख़र उस को होना है 'नदीम'

वो ख़लाओं का मकीं है नूर की रफ़्तार मैं

पुस्तकें 6

 

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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