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ख़ान आरज़ू सिराजुद्दीन अली

1679 - 1756 | दिल्ली, भारत

भाषाविद्, मीर तक़ी मीर और मीर दर्द के उस्ताद

भाषाविद्, मीर तक़ी मीर और मीर दर्द के उस्ताद

ग़ज़ल 2

 

शेर 2

अबस दिल बे-कसी पे अपनी अपनी हर वक़्त रोता है

कर ग़म दिवाने इश्क़ में ऐसा ही होता है

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जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं

ज़िंदगानी का क्या भरोसा है

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पुस्तकें 5

Khayabaan

Sharh-e-Gulistan

1877

Majma-un-Nafais

Tazkira-e-Shora-e-Farsi

1992

Nawadir-ul-Alfaaz

 

1951

Nawadir-ul-Alfaz

 

1876

Sirajuddin Ali Khan Arzoo

Ek Mutaala

2004

 

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