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मुफ़्ती सदरुद्दीन आज़ुर्दा

दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 13

शेर 8

दिल तमाम नफ़अ' है सौदा-ए-इश्क़ में

इक जान का ज़ियाँ है सो ऐसा ज़ियाँ नहीं

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वो और वा'दा वस्ल का क़ासिद नहीं नहीं

सच सच बता ये लफ़्ज़ उन्ही की ज़बाँ के हैं

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'आज़ुर्दा' मर के कूचा-ए-जानाँ में रह गया

दी थी दुआ किसी ने कि जन्नत में घर मिले

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ई-पुस्तक 5

Mufti Sadruddin Aazurda

Hayat, Shakhsiyat, Ilmi Aur Adabi Karname

1977

Tazkira-e-Aazurda

 

1974

 

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