ग़ज़ल 15

शेर 7

कल तिरे एहसास की बारिश तले

मेरा सूना-पन नहाया देर तक

मिरी प्यास का तराना यूँ समझ सकेगा

मुझे आज सुन के देखो मिरी ख़ामोशी से आगे

ज़ख़्म भी अब हसीन लगते हैं

तेरे हाथों फ़रेब खाने पर

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