ग़ज़ल 15

शेर 7

कल तिरे एहसास की बारिश तले

मेरा सूना-पन नहाया देर तक

मिरी प्यास का तराना यूँ समझ सकेगा

मुझे आज सुन के देखो मिरी ख़ामोशी से आगे

ज़ख़्म भी अब हसीन लगते हैं

तेरे हाथों फ़रेब खाने पर

"दिल्ली" के और शायर

  • नसीम देहलवी नसीम देहलवी
  • हकीम आग़ा जान ऐश हकीम आग़ा जान ऐश
  • हीरा लाल फ़लक देहलवी हीरा लाल फ़लक देहलवी
  • नज़र बर्नी नज़र बर्नी
  • शकील शम्सी शकील शम्सी
  • ममनून निज़ामुद्दीन ममनून निज़ामुद्दीन
  • साहिबा शहरयार साहिबा शहरयार
  • सुबोध लाल साक़ी सुबोध लाल साक़ी
  • नूरुल ऐन क़ैसर क़ासमी नूरुल ऐन क़ैसर क़ासमी
  • चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी