शेर 1

हम अपनी ज़िंदा लाशों की बुझाएँ तिश्नगी कैसे

यहाँ पानी पे उभरी लाश के टुकड़े भी आते हैं

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पुस्तकें 2

Jung-e-Azadi Ka Gumshuda Mujahid

 

2009

Mafizzamir

 

1989

 

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