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साक़िब लखनवी

1869 - 1946 | लखनऊ, भारत

प्रमुख उत्तर कलासिकी शायर / अपने शेर ‘बड़े ग़ौर से सुन रहा था ज़माना...’ के लिए मशहूर

प्रमुख उत्तर कलासिकी शायर / अपने शेर ‘बड़े ग़ौर से सुन रहा था ज़माना...’ के लिए मशहूर

ग़ज़ल 46

शेर 19

ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था

हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते

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आधी से ज़ियादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ

अब भी अगर जाओ तो ये रात बड़ी है

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बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मिरे

जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे

मुट्ठियों में ख़ाक ले कर दोस्त आए वक़्त-ए-दफ़्न

ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला देने लगे

सुनने वाले रो दिए सुन कर मरीज़-ए-ग़म का हाल

देखने वाले तरस खा कर दुआ देने लगे

पुस्तकें 2

इंतिख़ाब-ए-ग़ज़लियात-ए-साक़िब

 

1983

Saqib Lucnwi Hayat Aur Shairi

 

1984

 

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