आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "kaj"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "kaj"
नज़्म
मुहासरा
वो बर्क़ लहर बुझा दी गई है जिस की तपिश
वजूद-ए-ख़ाक में आतिश-फ़िशाँ जगाती थी
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
तिरी कज-अदाई से हार के शब-ए-इंतिज़ार चली गई
मिरे ज़ब्त-ए-हाल से रूठ कर मिरे ग़म-गुसार चले गए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "kaj"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "kaj"
नज़्म
तस्वीर-ए-दर्द
उड़ा ली क़ुमरियों ने तूतियों ने अंदलीबों ने
चमन वालों ने मिल कर लूट ली तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ मेरी
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
अगर कज-रौ हैं अंजुम आसमाँ तेरा है या मेरा
मुझे फ़िक्र-ए-जहाँ क्यूँ हो जहाँ तेरा है या मेरा
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
सितम पे ख़ुश कभी लुत्फ़-ओ-करम से रंजीदा
सिखाईं तुम ने हमें कज-अदाइयाँ क्या क्या
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
क्या क्या उलझता है तिरी ज़ुल्फ़ों के तार से
बख़िया-तलब है सीना-ए-सद-चाक शाना क्या
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
कई बार इस का दामन भर दिया हुस्न-ए-दो-आलम से
मगर दिल है कि इस की ख़ाना-वीरानी नहीं जाती














