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नज़्म
शिकवा
क़ौम-ए-आवारा इनाँ-ताब है फिर सू-ए-हिजाज़
ले उड़ा बुलबुल-ए-बे-पर को मज़ाक़-ए-परवाज़
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है
अल्लामा इक़बाल
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विषय
पारसाई
पारसाई शायरी
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नज़्म
तुलू-ए-इस्लाम
मियान-ए-शाख़-साराँ सोहबत-ए-मुर्ग़-ए-चमन कब तक
तिरे बाज़ू में है परवाज़-ए-शाहीन-ए-क़हस्तानी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी
वक़्त पर्वाज़ करेगा कि ठहर जाएगा
जीत हो जाएगी या खेल बिगड़ जाएगा
परवीन शाकिर
शेर
अपने मरकज़ की तरफ़ माइल-ए-परवाज़ था हुस्न
भूलता ही नहीं आलम तिरी अंगड़ाई का
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
नज़्म
तस्वीर-ए-दर्द
शराब-ए-बे-ख़ुदी से ता-फ़लक परवाज़ है मेरी
शिकस्त-ए-रंग से सीखा है मैं ने बन के बू रहना
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
वालिदा मरहूमा की याद में
ज़र्रा ज़र्रा दहर का ज़िंदानी-ए-तक़दीर है
पर्दा-ए-मजबूरी ओ बेचारगी तदबीर है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मिर्ज़ा 'ग़ालिब'
नुत्क़ को सौ नाज़ हैं तेरे लब-ए-एजाज़ पर
महव-ए-हैरत है सुरय्या रिफ़अत-ए-परवाज़ पर














