आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "samar"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "samar"
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "samar"
विषय
समाज
समाज शायरी
अन्य परिणाम "samar"
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
जिस की पीरी में है मानिंद-ए-सहर रंग-ए-शबाब
कह रहा है मुझ से ऐ जूया-ए-असरार-ए-अज़ल
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तस्वीर-ए-दर्द
मिरी बिगड़ी हुई तक़दीर को रोती है गोयाई
मैं हर्फ़-ए-ज़ेर-ए-लब शर्मिंदा-ए-गोश-ए-समाअत हूँ
अल्लामा इक़बाल
शेर
ये जो रौशनी है कलाम में कि बरस रही है तमाम में
मुझे सब्र ने ये समर दिया मुझे ज़ब्त ने ये हुनर दिया
सरवत हुसैन
नज़्म
एक मुलाक़ात
रुकी तो ऐसे कि जैसे तिरी रियाज़त को
अब इस समर से ज़ियादा समर मिले न मिले














