अलम पर शेर

हौसला है तो सफ़ीनों के अलम लहराओ

बहते दरिया तो चलेंगे इसी रफ़्तार के साथ

शहज़ाद अहमद

हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज़ का अलम

चुप बैठने से हल नहीं होने का मसअला

ज़िया जालंधरी

शजर ने पूछा कि तुझ में ये किस की ख़ुशबू है

हवा-ए-शाम-ए-अलम ने कहा उदासी की

रहमान फ़ारिस

हम हैं तहज़ीब के अलम-बरदार

हम को उर्दू ज़बान आती है

मोहम्मद अली साहिल

हमारी फ़त्ह के अंदाज़ दुनिया से निराले हैं

कि परचम की जगह नेज़े पे अपना सर निकलता है

फ़सीह अकमल

वो हिन्दी नौजवाँ यानी अलम-बरदार-ए-आज़ादी

वतन की पासबाँ वो तेग़-ए-जौहर-दार-ए-आज़ादी

मख़दूम मुहिउद्दीन

इन दिनों अपनी भी वहशत का अजब आलम है

घर में हम दश्त-ओ-बयाबान उठा लाए हैं

शाहिद कमाल

वो ग़म हो या अलम हो दर्द हो या आलम-ए-वहशत

उसे अपना समझ ज़िंदगी जो तेरे काम आए

शौक़ असर रामपुरी

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

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