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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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रहमत क़रनी

ग़ज़ल 2

 

अशआर 1

ईद का चाँद जो देखा तो तमन्ना लिपटी

उन से तक़रीब-ए-मुलाक़ात का रिश्ता निकला

 

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