aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
तुम्हारे हिस्से के जितने भी ग़म हैं मैं ले लूँ
मिरे नसीब की हर इक ख़ुशी मिले तुम को
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
कुछ तअल्लुक़ भी नहीं रस्म-ए-जहाँ से आगे
उस से रिश्ता भी रहा वहम ओ गुमाँ से आगे
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