aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

लेखक : बेख़ुद देहलवी

संस्करण संख्या : 001

प्रकाशक : दिल्ली प्रिंटिंग वर्क्स, दिल्ली

प्रकाशन वर्ष : 1930

भाषा : Urdu

श्रेणियाँ : शाइरी

उप श्रेणियां : दीवान

पृष्ठ : 195

सहयोगी : अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द), देहली

durr-e-shahwar-e-bekhud

पुस्तक: परिचय

زیر تبصرہ کتاب "در شہوار بیخود" بیخود دہلوی کا دوسرا دیوان ہے، بیخود دہلوی، چونکہ داغ کے شاگرد تھے، اس لئے اس دیوان کی غزلوں میں داغ والی نزاکتیں، ٹکسالی زبان، فصاحت و بلاغت، تشبیہات و محاورات اور بندش کی خوش اسلوبی ظاہر ہے۔ دیوان کے شروع میں حمد اور نعتیں ہیں جو کہ غزل کی فارم میں ہے۔ اس دیوان میں ایک قصیدہ، کچھ مدحیہ قطعات، سہرے، سلام، کچھ رباعیات کے علاوہ متقرق اشعار بھی ہیں۔

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लेखक: परिचय

बेख़ुद देहलवी, सय्यद वहीदुद्दीन (1863-1955)पैदा भरतपुर में हुए मगर परवान चढ़े देहली में और सारी उ’म्र यहीं रहे। शाइ’रों के घराने से संबंध था तो शाइ’री उन्हें विरासत में मिली थी। मौलाना ‘हाली’ से ता’लीम हासिल की और उन्हीं के कहने पर ‘दाग़’ देहलवी के शागिर्द हुए। उस्ताद का रंग इतना चढ़ा कि अपना अलग कोई रंग न बन पाया। अच्छा खाते, अच्छा पहनते थे और ख़ूब खर्च करते थे। देहली की ज़बान उनकी शाइ’री की जान है।

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