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अब्दुल मजीद सालिक

1894 - 1959 | लाहौर, पाकिस्तान

मशहूर शायर और पत्रकार, अपने समय के लोकप्रिय समाचारपत्र ‘ज़मींदार’ के सम्पादक रहे. ‘ज़िक्र-ए-इक़बाल’ और ‘मुस्लिम सहाफ़त हिंदुस्तान में’ जैसी किताबें यादगार छोड़ीं

मशहूर शायर और पत्रकार, अपने समय के लोकप्रिय समाचारपत्र ‘ज़मींदार’ के सम्पादक रहे. ‘ज़िक्र-ए-इक़बाल’ और ‘मुस्लिम सहाफ़त हिंदुस्तान में’ जैसी किताबें यादगार छोड़ीं

ग़ज़ल 8

शेर 9

जो उन्हें वफ़ा की सूझी तो ज़ीस्त ने वफ़ा की

अभी के वो बैठे कि हम उठ गए जहाँ से

तुझे कुछ इश्क़ उल्फ़त के सिवा भी याद है दिल

सुनाए जा रहा है एक ही अफ़्साना बरसों से

इश्क़ है बे-गुदाज़ क्यूँ हुस्न है बे-नियाज़ क्यूँ

मेरी वफ़ा कहाँ गई उन की जफ़ा को क्या हुआ

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लतीफ़े 9

पुस्तकें 13

चित्रा

 

 

Ijadat

 

1930

Muslim Saqafat Hindustan Mein

 

 

Muslim Saqafat Hindustan Mein

 

 

Sarguzisht

 

1955

Sarguzisht

 

1993

Yaran-e-Kuhan

 

1955

ज़िक्र-ए-इक़बाल

 

1983

Zikr-e-Iqbal

 

 

ज़िक्र-ए-इक़बाल

 

1955

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