Alimullah Hali's Photo'

अलीमुल्लाह हाली

1940 | पटना, भारत

अलीमुल्लाह हाली

ग़ज़ल 9

नज़्म 1

 

अशआर 4

एक आवाज़ ने तोड़ी है ख़मोशी मेरी

ढूँढता हूँ तो पस-ए-साहिल-ए-शब कुछ भी नहीं

कोई पत्थर का निशाँ रख के जुदा हों हम तुम

जाने ये पेड़ किस आँधी में उखड़ जाएगा

सदाओं के जंगल में वो ख़ामुशी है

कि मैं ने हर आवाज़ तेरी सुनी है

बिखर के छूट जाऊँ तिरी गिरफ़्त से मैं

सँभाल कर मुझे मौज-ए-ख़ुश-अदा ले जा

बच्चों की कहानी 1

 

पुस्तकें 35

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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