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आरिफ़ अब्दुल मतीन

1923 - 2001 | लाहौर, पाकिस्तान

उर्दू और पंजाबी के शायर व लेखक, प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका ‘अदब-ए-लतीफ़’ और ‘औराक़’ के सम्पादकीय विभाग से सम्बद्ध रहे

उर्दू और पंजाबी के शायर व लेखक, प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका ‘अदब-ए-लतीफ़’ और ‘औराक़’ के सम्पादकीय विभाग से सम्बद्ध रहे

आरिफ़ अब्दुल मतीन

ग़ज़ल 18

नज़्म 2

 

अशआर 8

वफ़ा निगाह की तालिब है इम्तिहाँ की नहीं

वो मेरी रूह में झाँके आज़माए मुझे

कभी ख़याल के रिश्तों को भी टटोल के देख

मैं तुझ से दूर सही तुझ से कुछ जुदा भी नहीं

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ज़ात का आईना जब देखा तो हैरानी हुई

मैं था गोया कोई मुझ सा था मेरे रू-ब-रू

चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा था

मिरे सूरज अभी आना तिरा अच्छा था

था ए'तिमाद-ए-हुस्न से तू इस क़दर तही

आईना देखने का तुझे हौसला था

पुस्तकें 21

"लाहौर" के और शायर

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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