हुमैरा राहत

ग़ज़ल 15

नज़्म 11

अशआर 18

ज़िक्र सुनती हूँ उजाले का बहुत

उस से कहना कि मिरे घर आए

हुज़ूर आप कोई फ़ैसला करें तो सही

हैं सर झुके हुए दरबार भी लगा हुआ है

सुना है ख़्वाब मुकम्मल कभी नहीं होते

सुना है इश्क़ ख़ता है सो कर के देखते हैं

गुज़र जाएगी सारी रात इस में

मिरा क़िस्सा कहानी से बड़ा है

तअल्लुक़ की नई इक रस्म अब ईजाद करना है

उस को भूलना है और उस को याद करना है

पुस्तकें 1

 

चित्र शायरी 3

 

"कराची" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI