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इमाम अाज़म

1960 | कोलकाता, भारत

शायर,आलोचक,पत्रकार और साहित्यिक पत्रिका "तमसील-ए-नौ" के ऑनरेरी संपादक

शायर,आलोचक,पत्रकार और साहित्यिक पत्रिका "तमसील-ए-नौ" के ऑनरेरी संपादक

इमाम अाज़म

ग़ज़ल 12

नज़्म 1

 

अशआर 10

तेरी ख़ुशबू से मोअत्तर है ज़माना सारा

कैसे मुमकिन है वो ख़ुशबू भी गुलाबों में मिले

आस्था का रंग जाए अगर माहौल में

एक राखी ज़िंदगी का रुख़ बदल सकती है आज

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दुनिया की इक रीत पुरानी, मिलना और बिछड़ना है

एक ज़माना बीत गया है तुम कब मिलने आओगे

किसी की बात कोई बद-गुमाँ समझेगा

ज़मीं का दर्द कभी आसमाँ समझेगा

हर तरफ़ इक जंग का माहौल है 'आज़म' यहाँ

आदमी अब घर के भी अंदर सलामत है कहाँ

पुस्तकें 48

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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