ग़ज़ल 7

शेर 5

एक ही शय थी ब-अंदाज़-ए-दिगर माँगी थी

मैं ने बीनाई नहीं तुझ से नज़र माँगी थी

तमाम मज़हर-ए-फ़ितरत तिरे ग़ज़ल-ख़्वाँ हैं

ये चाँदनी भी तिरे जिस्म का क़सीदा है

उन से मिलने का मंज़र भी दिल-चस्प था 'असर'

इस तरफ़ से बहारें चलीं और उधर से खिज़ाएँ चलीं

पुस्तकें 11

Aaj Ki Science

 

2006

Basharat

 

1975

Gulabi Maut

 

1972

Khooni Shama

 

 

Lashareek

 

1988

मौत के बाद

 

 

Maut Ke Baad

 

2009

Miss China

 

 

Three X

 

1960

Ubharte Jauban

 

 

"दिल्ली" के और शायर

  • राशिद जमाल फ़ारूक़ी राशिद जमाल फ़ारूक़ी
  • नियाज़ हैदर नियाज़ हैदर
  • नश्तर अमरोहवी नश्तर अमरोहवी
  • नज़्मी सिकंदराबादी नज़्मी सिकंदराबादी
  • मीर शम्सुद्दीन फ़क़ीर मीर शम्सुद्दीन फ़क़ीर
  • अबीर अबुज़री अबीर अबुज़री
  • मज़हर इमाम मज़हर इमाम
  • राज नारायण राज़ राज नारायण राज़
  • मोहम्मद यूसुफ़ पापा मोहम्मद यूसुफ़ पापा
  • शहाब जाफ़री शहाब जाफ़री