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मुस्तफ़ा खां यकरंग

- 1737 | लखनऊ, भारत

मुस्तफ़ा खां यकरंग

शेर 3

क्या जानिए कि वस्ल तिरा किस को हो नसीब

हम तो तिरे फ़िराक़ में यार मर गए

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जिगर किसी का जले दिल जले दिमाग़ जले

वो कह गए हैं कि आएँगे हम चराग़ जले

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कहो ये कि यार जाता है

मेरा सब्र-ओ-क़रार जाता है

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