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नज़ीर बनारसी

1909 - 1996 | बनारस, भारत

नज़ीर बनारसी

ग़ज़ल 25

नज़्म 14

अशआर 14

ये इनायतें ग़ज़ब की ये बला की मेहरबानी

मिरी ख़ैरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी

बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया

ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया

एक दीवाने को जो आए हैं समझाने कई

पहले मैं दीवाना था और अब हैं दीवाने कई

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उम्र भर की बात बिगड़ी इक ज़रा सी बात में

एक लम्हा ज़िंदगी भर की कमाई खा गया

अंधेरा माँगने आया था रौशनी की भीक

हम अपना घर जलाते तो और क्या करते

क़ितआ 8

रुबाई 10

पुस्तकें 7

 

चित्र शायरी 1

 

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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