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नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
ग़रज़ जो हाल था वो नफ़्स के बाज़ार ही का था
है ''ज़'' बाज़ार में तो दरमियाँ 'ज़रयून' में अव्वल
जौन एलिया
नज़्म
तुलू-ए-इस्लाम
असर कुछ ख़्वाब का ग़ुंचों में बाक़ी है तू ऐ बुलबुल
नवा-रा तल्ख़-तरमी ज़न चू ज़ौक़-ए-नग़्मा कम-याबी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
मज्लिस-ए-आईन-ओ-इस्लाह-ओ-रिआयात-ओ-हुक़ूक़
तिब्ब-ए-मग़रिब में मज़े मीठे असर ख़्वाब-आवरी
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
तीन मोहल्लों में उन जैसी क़द काठी का कोई न था
अच्छे-ख़ासे ऊँचे पूरे क़द-आवर थे बाबू जी
आलोक श्रीवास्तव
ग़ज़ल
बाग़ में वो ख़्वाब-आवर 'आलम मौज-ए-सबा के इशारों पर
डाली डाली नौरस पत्ते सहज सहज जब डोलें हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
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नज़्म
मिरे गीत
तो दिल ताब-ए-नशात-ए-बज़्म-ए-इशरत ला नहीं सकता
मैं चाहूँ भी तो ख़्वाब-आवर तराने गा नहीं सकता
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
हाल-ए-दिल है कोई ख़्वाब-आवर फ़साना तो नहीं
नींद अभी से तुम को ऐ यारान-ए-महफ़िल आ गई
हफ़ीज़ होशियारपुरी
ग़ज़ल
किसी की चश्म-ए-सुरूर आवर से अश्क आरिज़ पे ढल रहा है
अगर शुऊर-नज़र है देखो शराब आधी गुलाब आधा
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
ग़ज़ल
मैं हर नेकी को अपने दुश्मनों में बाँट देती हूँ
समर-आवर रहा करती हैं इस से नेकियाँ मेरी
ग़ौसिया ख़ान सबीन
ग़ज़ल
जब बुज़ुर्गों की दुआएँ हो गईं बे-कार सब
क़र्ज़-ए-ख़्वाब-आवर से दिल को शाद कर लेते हैं हम
वामिक़ जौनपुरी
नज़्म
नए सुर की तमसील
बहुत सेहर-आवर सही जागने और सोने में इक
ख़्वाब-ए-मौहूम से कुछ ज़ियादा नहीं
अख़्तर उस्मान
ग़ज़ल
कह दो मुग़न्नी से अब ठहरे ख़्वाब-आवर नग़्मे रोके रोके
कोई हमें ललकार रहा है पर्बत से मीनारों से














