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नज़्म
शिकवा
महफ़िल-ए-कौन-ओ-मकाँ में सहर ओ शाम फिरे
मय-ए-तौहीद को ले कर सिफ़त-ए-जाम फिरे
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तुलू-ए-इस्लाम
दिगर शाख़-ए-ख़लील अज़ ख़ून-ए-मा नमनाक मी गर्दद
ब-बाज़ार-ए-मोहब्बत नक़्द-ए-मा कामिल अय्यार आमद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
ख़ाक-ओ-ख़ूँ में मिल रहा है तुर्कमान-ए-सख़्त-कोश
आग है औलाद-ए-इब्राहीम है नमरूद है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ज़ौक़ ओ शौक़
किस से कहूँ कि ज़हर है मेरे लिए मय-ए-हयात
कोहना है बज़्म-ए-कायनात ताज़ा हैं मेरे वारदात!
अल्लामा इक़बाल
हास्य
एक मिस सीमीं बदन से कर लिया लंदन में अक़्द
इस ख़ता पर सुन रहा हूँ ताना-हा-ए-दिल-ख़राश
अकबर इलाहाबादी
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हास्य
कुछ मिसालें दे के समझाओ ये क़ौल-ए-मुस्तनद
इश्क़ अव्वल दर-दिल-ए-माशूक़ पैदा मी शुअद
दिलावर फ़िगार
मुखम्मस
बुज़ुर्गों का भी फ़तवा है कि पढ़ क़ानून-ए-सर-सय्यद
ब-मी सज्जादा-रंगीं कुन गिरत पीर-ए-मुग़ाँ गोयद
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
अदल-ए-जहाँगीरी
दफ़अतन पाँव पे बेगम के गिरा और ये कहा
तू अगर कुश्ता शुदी आह चे मी कर्दम मन
शिबली नोमानी
हास्य
भूलती जाती है दुनिया अब ये क़ौल-ए-मुस्तनद
'अक़्ल चूँ पुख़्ता शवद इंसान अहमक़ मी शवद
दिलावर फ़िगार
नज़्म
वज़ीर का ख़्वाब
मुझ से इज़्ज़त-दार डरते हैं मैं हूँ इज़्ज़त-मआब
''ईं कि मी बीनम ब बेदारीसत यारब या ब ख़्वाब''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
ग़ज़ल
अँधेरी रात से डरता है मीर-ए-कारवाँ हो के
अँधेरा है तो अपने दाग़-ए-दिल की रौशनी फैला













