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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
ख़स ओ ख़ाशाक से होता है गुलिस्ताँ ख़ाली
गुल-बर-अंदाज़ है ख़ून-ए-शोहदा की लाली
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
सुर्ख़ी में नहीं दस्त-ए-हिना-बस्ता भी कुछ कम
पर शोख़ी-ए-ख़ून-ए-शोहदा मेरे लिए है
मौलाना मोहम्मद अली जौहर
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नज़्म
सामान दीवाली का
ख़ुदा ने तुझ को तो शोहदा किया दिवाली का
वो उस के झोंटे पकड़ कर कहे है मारुँगा
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
मीर-अनीस
किस किस अंदाज़ से तहरीर किया हाल-ए-सितम
ग़म किया आप ने शाह-ए-शोहदा का क्या क्या
नाज़िश प्रतापगढ़ी
ग़ज़ल
आह वो शो'ला है जो जी को बुझा के उट्ठे
दर्द वो फ़ित्ना है जो दिल को बिठा के उट्ठे
दत्तात्रिया कैफ़ी
ग़ज़ल
हाँ हाँ तिरी सूरत हसीं लेकिन तू ऐसा भी नहीं
इक शख़्स के अशआ'र से शोहरा हुआ क्या क्या तिरा
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो
चश्म-ए-नम जान-ए-शोरीदा काफ़ी नहीं
तोहमत-ए-इश्क़-ए-पोशीदा काफ़ी नहीं













