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दिल्ली के शायर और अदीब

कुल: 336

उर्दू के सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल। शायरी में चुस्ती , शोख़ी और मुहावरों के इस्तेमाल के लिए प्रसिद्ध

सूफ़ी शायर, मीर तक़ी मीर के समकालीन। भारतीय संगीत के गहरे ज्ञान के लिए प्रसिध्द

प्रमुख मर्सिया-निगार, मसनवी ‘सहर-उल-बयान’ के लिए विख्यात

उर्दू के अनोखी शैली के गद्यकार और शायर. ‘आब-ए-हयात’ के रचनाकार. उर्दू में आधुनिक कविता के आन्दोलन के संस्थापकों में शामिल.

18वी सदी के बड़े शायरों में शामिल। मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन

ग़ालिब और ज़ौक़ के समकालीन। वह हकीम, ज्योतिषी और शतरंज के खिलाड़ी भी थे। कहा जाता है मिर्ज़ा ग़ालीब ने उनके शेर "तुम मेरे पास होते हो गोया, जब कोई दूसरा नही होता" पर अपना पूरा दीवान देने की बात कही थी

मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन। अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली, दीवाली, श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

18वीं सदी के अग्रणी शायरों में विख्यात

प्रमुख क्लासिकी शायर, मीर दर्द के छोटे भाई।

शायरी के अलावा अपनी सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध। कम उम्र में देहांत हुआ

मुग़ल बादशाह शाह आलम सानी के उस्ताद, मीर तक़ी मीर के बाद के शायरों के समकालीन

ग़ालिब की गज़लों के आलोचक

लोकप्रिय शायर और फि़ल्म गीतकार/प्रेम रोग और राम तेरी गंगा मैली के गीतों के लिए मशहूर

18 वीं सदी के प्रमुख शायरों में शामिल / मीर तक़ी मीर के समकालीन

आख़िरी मुग़ल बादशाह। ग़ालिब और ज़ौक़ के समकालीन

मीर से पहले के मशहूर शायर, उर्दू शायरी के संस्थापक

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन और उनके प्रतिद्वंदी के तौर पर प्रसिद्ध। उन्हे उनके पिता ने क़त्ल किया।

अपने दोहों के लिए मशहूर।

सुप्रिसिद्ध लेखक जो फोर्ट विलियम कॉलेज से जुड़े रहे और उर्दू में आधुनिक गद्य की स्थापना में अहम किरदार निभाया

हास्य-व्यंग्यकार, रेखाचित्र लेखक और देहलवी भाषा एवं संस्कृति के दर्पण

उर्दू के दो बड़े मर्सिया-गो शाइरों में शामिल

मुकेश

1923 - 1976

इतिहासकार, अनुवादक, गणितज्ञ और आधुनिक गद्य के निर्माता

महत्वपूर्ण आधुनिक शायर और फ़िल्म गीतकार। अपनी ग़ज़ल ' कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ' के लिए प्रसिद्ध

क्लासिकी दौर के नुमायाँ शायरों में शामिल

आधुनिक उर्दू गद्य के प्रथम पंक्ति के लिखने वालों में शामिल. इनके लेखन ने उर्दू में अफ़्सानानिगारी के रूझान को परवान चढ़ाया. ‘मुसव्विर-ए-ग़म’ के रूप में जाने जाते हैं.

मुमत़ाज़ तरीन क्लासीकी शाइरों में शुमार, उर्दू के पहले इस्लाह-ए-ज़बान के अलमबरदार, शाइरी में ईहाम-गोई का रंग

भूतपूर्व आई.पी .एस अधिकारी जिन्होने आपनी नौकरी बीच में ही छोड़ दी थी।

लब्धप्रतिष्ठ विचारक, शोधकर्ता और शिक्षाविद। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक

अहम क्लासिकी शायर, ग़ालिब की बीवी के भांजे, जिन्हें ग़ालिब ने अपने सात बच्चों के असमय निधन के बाद बेटा बना लिया था. ग़ालिब आरिफ़ की शायरी के प्रशंसकों में भी शामिल थे

मुग़ल बादशाह जिन्होंने लाल क़िले और अपने दरबार में उर्दू शायरी का सिलसिला शुरू किया

उत्तर-क्लासिकी युग के महत्वपूर्ण शायर, दाग़ देहलवी के शागिर्द।

उत्तर-क्लासिकी शायर, ज़ौक़ और ग़ालिब के शिष्य अपने सर्वाधिक लोकप्रिय शेरों के लिए प्रसिद्ध

दिल्ली की काव्य परम्परा के अंतिम दौर के शायरों में शामिल, अपने ड्रामे ‘कृष्ण अवतार’ के लिए प्रसिद्ध

स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक और जननेता

प्रतिष्ठित शायर, अपने शेर " मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़सूस होते हैं " के लिए मशहूर

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