दिल्ली के शायर और अदीब

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उर्दू शायरी के निर्माताओं में से एक, मीर तक़ी मीर के समकालीन।

उर्दू / हिंदवी के पहले शायर। मशहूर सूफ़ी हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के शागिर्द और संगीतज्ञ। तबला और सितार जैसे साज़ों का अविष्कार किया। अपनी ' पहेलियों ' के लिए प्रसिद्ध जो भारतीय लोक साहित्य का हिस्सा हैं। ' ज़े हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल ' जैसी ग़ज़ल लिखी जो उर्दू / हिंदवी शायरी का पहला नमूना है।

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में विख्यात, जिन्होंने आधुनिक उर्दू गज़ल के लिए राह बनाई/अपने गहरे आलोचनात्मक विचारों के लिए विख्यात/भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित

सूफ़ी शायर, मीर तक़ी मीर के समकालीन। भारतीय संगीत के गहरे ज्ञान के लिए प्रसिध्द

महान शायर/विश्व-साहित्य में उर्दू की आवाज़/सब से अधिक लोकप्रिय सुने और सुनाए जाने वाले अशआर के रचयिता

ग़ालिब और ज़ौक़ के समकालीन। वह हकीम, ज्योतिषी और शतरंज के खिलाड़ी भी थे। कहा जाता है मिर्ज़ा ग़ालीब ने उनके शेर ' तुम मेरे पास होते हो गोया/ जब कोई दूसरा नही होता ' पर अपना पूरा दीवान देने की बात कही थी।

शायरी के अलावा अपनी सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध। कम उम्र में देहांत हुआ

मुग़ल बादशाह शाह आलम सानी के उस्ताद, मीर तक़ी मीर के बाद के शायरों के समकालीन

ग़ालिब की गज़लों के आलोचक

आधुनिक उर्दू शायरी और आलोचना का महत्वपूर्ण नाम। भारतीय दर्शन और संगीत से गहरी दिलचस्पी। आल इंडिया रेडियो से संबंधित थे।

अग्रणी आधुनिक शायार और कहानिकार, भारत में आधुनिक उर्दू नज़्म के विकास में महत्वपूर्ण यागदान, पद्मश्री से सम्मानित।

दाग़ देहलवी के शिष्य

उर्दू के पहले उपन्यासकार के रूप में विख्यात

मीर से पहले के मशहूर शायर, उर्दू शायरी के संस्थापक

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर। उनकी कुछ ग़ज़लें ' बाज़ार ' और ' गमन ' , जैसी फिल्मों से मशहूर

पंडित अमरनाथ साहिर दिल्ली में कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रमुख कवियों में एक महत्वपूर्ण नाम। अपनी रचनाओं में सूफ़ीवाद और वेदांत रहस्यवाद के संयोजन के लिए चर्चित।

अग्रणी आधुनिक शायरों और आलोचकों में विख्यात।

आधुनिक उर्दू आलोचना के संस्थापकों में शामिल हैं।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के शीर्ष नेताओं में शामिल, महान विद्वान और विचारक।

उत्तर-क्लासिकी युग के महत्वपूर्ण शायर, दाग़ देहलवी के शागिर्द।

पंजाबी की लोकप्रिय कवयित्री-लेखिका। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज थे। लोक सभा के सदस्य भी रहे

उत्तर-क्लासिकी शायर, ज़ौक़ और ग़ालिब के शिष्य अपने सर्वाधिक लोकप्रिय शेरों के लिए प्रसिद्ध

मशहूर शायर जोश मलसियानी के पुत्र

क्लासिकी परंपरा के प्रमुख हास्य-व्यंग शायर, अपनी विशिष्ट भाषा और अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

क्लासिकी अंदाज़ के प्रमुख शायर / सीमाब अकबरकबादी के शागिर्द

प्रतिष्ठित पत्रकार और शायर

मुग़लिया सल्तनत के बादशाह शाहजहाँ की साहिबज़ादी और सूफ़ी ख़ातून, मुसन्निफ़ा शाइ’र

प्रतिष्ठित आधुनिक शायर, पत्रिका "सुतूर" के संपादक

प्रमुखतम आधुकि शायरों में विख्यात/दूर दर्शन से संबंध

रामायण, भगवत गीता, और दूसरे बहुत से मज़हबी व ग़ैर मज़हबी पाठों का छन्दोबद्ध व गयात्मक अनुवाद करने के लिए प्रसिद्ध

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