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अफ़सर इलाहाबादी

इलाहाबाद, भारत

ग़ज़ल 5

 

शेर 6

तुम्हारे हिज्र में क्यूँ ज़िंदगी मुश्किल हो

तुम्हीं जिगर हो तुम्हीं जान हो तुम्हीं दिल हो

मुझे गुम-शुदा दिल का ग़म है तो ये है

कि इस में भरी थी मोहब्बत किसी की

ख़बर देती है याद करता है कोई

जो बाँधा है हिचकी ने तार आते आते

ऑडियो 5

कुछ भी नहीं जो याद-ए-बुतान-ए-हसीं नहीं

तुम्हारे हिज्र में क्यूँ ज़िंदगी न मुश्किल हो

न हो या रब ऐसी तबीअत किसी की

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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