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अकबर मासूम

1960 - 2019 | कराची, पाकिस्तान

अकबर मासूम

ग़ज़ल 13

अशआर 10

रह जाएगी ये सारी कहानी यहीं धरी

इक रोज़ जब मैं अपने फ़साने में जाऊँगा

अब तुझे मेरा नाम याद नहीं

जब कि तेरा पता रहा हूँ मैं

अब तेरा खेल खेल रहा हूँ मैं अपने साथ

ख़ुद को पुकारता हूँ और आता नहीं हूँ मैं

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है मुसीबत में गिरफ़्तार मुसीबत मेरी

जो भी मुश्किल है वो मेरे लिए आसानी है

वो और होंगे जो कार-ए-हवस पे ज़िंदा हैं

मैं उस की धूप से साया बदल के आया हूँ

पुस्तकें 2

 

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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