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पाकिस्तान की युवा कवयित्रियों में एक महत्वपूर्ण नाम

पाकिस्तान की युवा कवयित्रियों में एक महत्वपूर्ण नाम

आसिमा ताहिर

ग़ज़ल 14

शेर 12

मिरे वजूद के अंदर है इक क़दीम मकान

जहाँ से मैं ये उदासी उधार लेती हूँ

ख़्वाब का इंतिज़ार ख़त्म हुआ

आँख को नींद से जगाते हैं

हम ने जब हाल-ए-दिल उन से अपना कहा

वो भी क़िस्सा किसी का सुनाने लगे

नहीं वो इतना भी पागल नहीं था

जो मर जाता मिरी वाबस्तगी में

चुभ रही है अँधेरी रात मुझे

हर सितारा बुझाए बैठी हूँ

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