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आज़ाद गुलाटी

1935

आधुनिक ग़ज़ल के लोकप्रिय शायर, अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर रहे

आधुनिक ग़ज़ल के लोकप्रिय शायर, अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर रहे

ग़ज़ल 29

शेर 25

एक वो हैं कि जिन्हें अपनी ख़ुशी ले डूबी

एक हम हैं कि जिन्हें ग़म ने उभरने दिया

आसमाँ एक सुलगता हुआ सहरा है जहाँ

ढूँढता फिरता है ख़ुद अपना ही साया सूरज

यादों की महफ़िल में खो कर

दिल अपना तन्हा तन्हा है

ई-पुस्तक 6

Aab-e-Sarab

 

1992

Aaghosh-e-Khayal

 

1964

Azkar

 

1987

Dasht-e-Sada

 

1976

जिस्मों का बनबास

 

 

Tikon Ka Karb

 

1973

 

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