ग़ज़ल 5

 

शेर 12

पूछो ज़रा ये चाँद से कैसे सहर हुई

इतनी तवील रात भी कैसे बसर हुई

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कुछ इस तरह क़रीब वो आया मिरे लिए

उस की तवज्जोह प्यार में चाहत का घर हुई

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वो यूँ तो लगता है सब के जैसा

मगर जुदा कुछ जनाब में है

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  • हिना अब्बास हिना अब्बास