ग़ज़ल 21

नज़्म 5

 

शेर 18

हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं

इक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

तुम्हारे रंग फीके पड़ गए नाँ?

मिरी आँखों की वीरानी के आगे

  • शेयर कीजिए

ज़माने अब तिरे मद्द-ए-मुक़ाबिल

कोई कमज़ोर सी औरत नहीं है

संबंधित शायर

  • इरुम ज़ेहरा इरुम ज़ेहरा समकालीन

"लाहौर" के और शायर

  • अल्लामा इक़बाल अल्लामा इक़बाल
  • ज़फ़र इक़बाल ज़फ़र इक़बाल
  • नासिर काज़मी नासिर काज़मी
  • अमजद इस्लाम अमजद अमजद इस्लाम अमजद
  • अब्बास ताबिश अब्बास ताबिश
  • मुनीर नियाज़ी मुनीर नियाज़ी
  • जावेद शाहीन जावेद शाहीन
  • नबील अहमद नबील नबील अहमद नबील
  • अहमद नदीम क़ासमी अहमद नदीम क़ासमी
  • साग़र सिद्दीक़ी साग़र सिद्दीक़ी