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हमीदा शाहीन

1963 | लाहौर, पाकिस्तान

ग़ज़ल 19

नज़्म 23

शेर 4

कौन बदन से आगे देखे औरत को

सब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में

तिरे गीतों का मतलब और है कुछ

हमारा धुन सरासर मुख़्तलिफ़ है

सितारा है कोई गुल है कि दिल है

तिरी ठोकर में पत्थर मुख़्तलिफ़ है

ई-पुस्तक 4

Dasht-e-Wajood

 

2006

Dasht-e-Wajood

 

2006

Dastak

 

2005

ज़िन्दा हूँ

 

2010

 

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