ग़ज़ल 11

शेर 2

मौत से आगे तक के मंज़र देखे हैं

तन्हाई से यूँही डर नहीं जाता मैं

उतनी देर समेटूँ सारे दुख तेरे

जितनी देर दोस्त बिखर नहीं जाता मैं

 

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