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सिकंदर अली वज्द

1914 - 1983 | औरंगाबाद, भारत

सिकंदर अली वज्द

ग़ज़ल 15

अशआर 7

दिल की बस्ती अजीब बस्ती है

ये उजड़ने के बा'द बस्ती है

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जाने वाले कभी नहीं आते

जाने वालों की याद आती है

बहार आए तो ख़ुद ही लाला नर्गिस बता देंगे

ख़िज़ाँ के दौर में दिलकश गुलिस्तानों पे क्या गुज़री

देर से रही है याद तिरी

क्या तुझे याद रहा हूँ मैं

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तमीज़-ए-ख़्वाब-ओ-हक़ीक़त है शर्त-ए-बेदारी

ख़याल-ए-अज़्मत-ए-माज़ी को छोड़ हाल को देख

पुस्तकें 24

वीडियो 3

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

सिकंदर अली वज्द

सिकंदर अली वज्द

ऑडियो 8

कैफ़ जो रूह पे तारी है तुझे क्या मालूम

ख़ुश-जमालों की याद आती है

ख़ुशी याद आई न ग़म याद आए

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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