Sufi Tabassum's Photo'

सूफ़ी तबस्सुम

1899 - 1978 | लाहौर, पाकिस्तान

ग़ज़ल 51

नज़्म 16

शेर 17

इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई

दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई

आज 'तबस्सुम' सब के लब पर

अफ़्साने हैं मेरे तेरे

देखे हैं बहुत हम ने हंगामे मोहब्बत के

आग़ाज़ भी रुस्वाई अंजाम भी रुस्वाई

लेख 1

 

रुबाई 24

क़ितआ 17

ई-पुस्तक 10

Do Guna

 

2005

दोगुना

अमीर ख़ुसरो की सौ ग़ज़लो का उर्दू ग़ज़ल में तरजुमा

1975

Ghazaliyat-e-Ghalib

Volume-001

2006

Jah-o-Jalal

 

1940

Jhoolne

 

2013

नक़्श-ए-इक़बाल

 

1977

Sara Parda-e-Aflak

 

1977

शरह-ए-ग़ज़लियात-ए-ग़ालिब (फ़ारसी)

खण्ड-001

 

Sufi Ghulam Mustafa Tabassum

Kitabiyat

1991

यक हज़ार-ओ-यक सुख़न

 

 

 

चित्र शायरी 3

सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तन्हाई इक लहज़ा बहे आँसू इक लहज़ा हँसी आई सीखे हैं नए दिल ने अंदाज़-ए-शकेबाई इस मौसम-ए-गुल ही से बहके नहीं दीवाने साथ अब्र-ए-बहाराँ के वो ज़ुल्फ़ भी लहराई हर दर्द-ए-मोहब्बत से उलझा है ग़म-ए-हस्ती क्या क्या हमें याद आया जब भी तिरी आई चरके वो दिए दिल को महरूमी-ए-क़िस्मत ने अब हिज्र भी तन्हाई और वस्ल भी तन्हाई देखे हैं बहुत हम ने हंगामे मोहब्बत के आग़ाज़ भी रुस्वाई अंजाम भी रुस्वाई ये बज़्म-ए-मोहब्बत है इस बज़्म-ए-मोहब्बत में दीवाने भी शैदाई फ़रज़ाने भी शैदाई

 

वीडियो 12

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
तिरी महफ़िल में सोज़-ए-जावेदानी ले के आया हूँ

सूफ़ी तबस्सुम

सुकून-ए-क़ल्ब ओ शकेब-ए-नज़र की बात करो

सूफ़ी तबस्सुम

हज़ार गर्दिश-ए-शाम-ओ-सहर से गुज़रे हैं

सूफ़ी तबस्सुम

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