आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "muntahaa"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "muntahaa"
नज़्म
नया सफ़र है पुराने चराग़ गुल कर दो
तवील राहगुज़र ख़त्म हो गई लेकिन
हनूज़ अपनी मसाफ़त का मुंतहा न मिला
साहिर लुधियानवी
नज़्म
हश्र की सुब्ह दरख़्शाँ हो मक़ाम-ए-महमूद
सिदरत-उल-मुंतहा जिब्रील इजाज़त माँगे
कौन था किस ने पुकारा कि चले भी आओ
आदिल मंसूरी
ग़ज़ल
नुमायाँ मुन्तहा-ए-सई-ए-पैहम होती जाती है
तबीअत बे-नियाज़-ए-हर-दो-आलम होती जाती है
जोश मलीहाबादी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "muntahaa"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "muntahaa"
ग़ज़ल
जचा न कुछ भी निगाहों को मुंतहा के सिवा
झुका ये सर न कहीं उन के नक़्श-ए-पा के सिवा
महेंद्र प्रताप चाँद
ग़ज़ल
मुंतहा-ए-ज़ौक़-ए-सज्दा ये कि इक पैहम फ़रेब
कुफ़्र तक ले आई तक्मील-ए-मुस्लमानी मुझे
एहसान दानिश कांधलवी
नज़्म
पत-झड़
नहीं मालूम कोई मुंतहा-ए-ज़िंदगी भी है
कि जुज़ इक नाला-ए-गर्दिश नहीं सरमाया-ए-आलम
उबैदुर्रहमान आज़मी
ग़ज़ल
कोई महव-ए-हुस्न-ओ-जमाल था कि कमाल-ए-शौक़-ए-विसाल था
लब-ए-औज-ए-सिदरा-ए-मुंतहा न रुका हुआ न थका हुआ
सरफ़राज़ बज़्मी
ग़ज़ल
तिरा रंग सब से जुदा सही तिरी शक्ल सब से हसीं मगर
मिरा मुब्तदा कोई और है मिरा मुंतहा कोई दूसरा
असअ'द बदायुनी
नज़्म
उम्मीद
क्या क़ुरआन के मुताबिक़ इंसान का मुन्तहा ख़ुदा नहीं
तो क्या हम ख़ुदा की जानिब महव-ए-सफ़र हैं












