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अंजुम रूमानी

1920 - 2001 | लाहौर, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायरा, इक़बाल के फ़ारसी कलाम का पद्यात्मक अनुवाद भी किया

पाकिस्तानी शायरा, इक़बाल के फ़ारसी कलाम का पद्यात्मक अनुवाद भी किया

अंजुम रूमानी

ग़ज़ल 16

नज़्म 1

 

अशआर 18

दिल से उठता है सुब्ह-ओ-शाम धुआँ

कोई रहता है इस मकाँ में अभी

सच के सौदे में पड़ना कि ख़सारा होगा

जो हुआ हाल हमारा सो तुम्हारा होगा

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देते नहीं सुझाई जो दुनिया के ख़त्त-ओ-ख़ाल

आए हैं तीरगी में मगर रौशनी से हम

समझी गई जो बात हमारी ग़लत तो क्या

याँ तर्जुमा कुछ और है आयत कुछ और है

पाप करो जी खोल कर धब्बों की क्या सोच

जब जी चाहा धो लिए गंगा-जल के साथ

पुस्तकें 2

 

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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