ग़ज़ल 21

नज़्म 8

शेर 20

बच्चों के साथ आज उसे देखा तो दुख हुआ

उन में से कोई एक भी माँ पर नहीं गया

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जुदाई की रुतों में सूरतें धुँदलाने लगती हैं

सो ऐसे मौसमों में आइना देखा नहीं करते

धड़कती क़ुर्बतों के ख़्वाब से जागे तो जाना

ज़रा से वस्ल ने कितना अकेला कर दिया है

पुस्तकें 5

फ़सादात के अफ़्साने

भाग-001

1999

ख़याबाँ

 

1991

Khayaban

Volume-002

 

Khayaban

 

 

Khwab Azab Hue

 

1985

 

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