ग़ज़ल 17

शेर 4

या इलाहाबाद में रहिए जहाँ संगम भी हो

या बनारस में जहाँ हर घाट पर सैलाब है

अपनी नाकामियों पे आख़िर-ए-कार

मुस्कुराना तो इख़्तियार में है

एक पत्थर कि दस्त-ए-यार में है

फूल बनने के इंतिज़ार में है

हम सितारों की तरह डूब गए

दिन क़यामत के इंतिज़ार में है

पुस्तकें 8

Chahar Khwab

 

1985

Chahar Khwab

 

2009

जदीद अदब की सरहदें

खण्ड-002

2000

जदीद अदब की सरहदें

खण्ड-001और खण्ड.002

2000

ख़्वाब-नुमा

 

 

Pakistani Adab-1992

Hissa-e-Sher

1993

Teen Kitabein

Akeli Bastiyan, Gul-e-Aagahi, Khwab Numa

1963

 

वीडियो 3

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
आज सितारे आँगन में हैं उन को रुख़्सत मत करना

क़मर जमील

ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है

क़मर जमील

शाम अजीब शाम थी जिस में कोई उफ़क़ न था

क़मर जमील

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