ग़ज़ल 1

 

शेर 2

क़ब्रों में नहीं हम को किताबों में उतारो

हम लोग मोहब्बत की कहानी में मरें हैं

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बहती हुई आँखों की रवानी में मरे हैं

कुछ ख़्वाब मिरे ऐन-जवानी में मरे हैं

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