noImage

इश्क़ औरंगाबादी

औरंगाबाद, भारत

ग़ज़ल 39

शेर 18

आईना कभी क़ाबिल-ए-दीदार होवे

गर ख़ाक के साथ उस को सरोकार होवे

मज़ा आब-ए-बक़ा का जान-ए-जानाँ

तिरा बोसा लिया होवे सो जाने

  • शेयर कीजिए

तू ने क्या देखा नहीं गुल का परेशाँ अहवाल

ग़ुंचा क्यूँ ऐंठा हुआ रहता है ज़रदार की तरह

  • शेयर कीजिए

ई-पुस्तक 2

Deewan-e-Ishq

 

1960

दीवान-ए-इश्क़

 

1960

 

"औरंगाबाद" के और शायर

  • जिगर मुरादाबादी जिगर मुरादाबादी
  • फ़रहत एहसास फ़रहत एहसास
  • अमीर मीनाई अमीर मीनाई
  • रियाज़ ख़ैराबादी रियाज़ ख़ैराबादी
  • नातिक़ गुलावठी नातिक़ गुलावठी
  • शैख़  ज़हूरूद्दीन हातिम शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
  • हैदर अली आतिश हैदर अली आतिश
  • जलील मानिकपूरी जलील मानिकपूरी
  • शकील बदायुनी शकील बदायुनी
  • फ़ानी बदायुनी फ़ानी बदायुनी