noImage

इश्क़ औरंगाबादी

औरंगाबाद, भारत

इश्क़ औरंगाबादी

ग़ज़ल 39

शेर 18

आईना कभी क़ाबिल-ए-दीदार होवे

गर ख़ाक के साथ उस को सरोकार होवे

'इश्क़' रौशन था वहाँ दीदा-ए-आहू से चराग़

मैं जो यक रात गया क़ैस के काशाने में

  • शेयर कीजिए

ये बुत हिर्स-ओ-हवा के दिल के जब काबा में तोडूँगा

तुम्हारी सुब्हा में कब शैख़-जी ज़ुन्नार छोड़ूँगा

  • शेयर कीजिए

मज़ा आब-ए-बक़ा का जान-ए-जानाँ

तिरा बोसा लिया होवे सो जाने

  • शेयर कीजिए

तू ने क्या देखा नहीं गुल का परेशाँ अहवाल

ग़ुंचा क्यूँ ऐंठा हुआ रहता है ज़रदार की तरह

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 2

 

"औरंगाबाद" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI