वेद राही

पुस्तकें 2

Andhi Surang

 

2005

Kab Lautenge Log?

 

1993

 

चित्र शायरी 1

दिल से जब लौ लगी नहीं होती आँख भी शबनमी नहीं होती जिस को ग़म ने हयात बख़्शी हो हर ख़ुशी वो ख़ुशी नहीं होती काँटे जब तक जवाँ नहीं होते शाख़ गुल की हरी नहीं होती ख़ास अंदाज़ जब सुख़न का न हो शाएरी शाएरी नहीं होती लब पे जबरन हँसी भी लाते हैं दर्द में कुछ कमी नहीं होती

 

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