दीदार पर 20 बेहतरीन शेर
इश्क़ बहुत सारी ख़्वाहिशों
का ख़ूबसूरत गुलदस्ता है। दीदार, तमन्ना का ऐसा ही एक हसीन फूल है जिसकी ख़ुश्बू आशिक़ को बेचैन किए रखती है। महबूब को देख लेने भर का असर आशिक़ के दिल पर क्या होता है यह शायर से बेहतर भला कौन जान सकता है। आँखें खिड़की, दरवाज़े और रास्ते से हटने का नाम न लें ऐसी शदीद ख़्वाहिश होती है दीदार की। तो आइये इसी दीदार शायरी से कुछ चुनिंदा अशआर की झलक देखते हैः
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भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया
ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं
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टैग्ज़: प्रसिद्ध मिसरेऔर 2 अन्य
ज़ाहिर की आँख से न तमाशा करे कोई
हो देखना तो दीदा-ए-दिल वा करे कोई
Interpretation:
Rekhta AI
अल्लामा इक़बाल बाहरी देखने और भीतर की समझ का अंतर दिखाते हैं। बाहरी आँख केवल दृश्य और दिखावा पकड़ती है, जबकि “दिल की आँख” गहरी सच्चाई और अर्थ तक पहुँचाती है। शेर मनुष्य को भीतर जागने और संवेदनशील दृष्टि विकसित करने की सीख देता है। भाव-केन्द्र यह है कि असली दर्शन अंतर्दृष्टि से मिलता है।
Interpretation:
Rekhta AI
अल्लामा इक़बाल बाहरी देखने और भीतर की समझ का अंतर दिखाते हैं। बाहरी आँख केवल दृश्य और दिखावा पकड़ती है, जबकि “दिल की आँख” गहरी सच्चाई और अर्थ तक पहुँचाती है। शेर मनुष्य को भीतर जागने और संवेदनशील दृष्टि विकसित करने की सीख देता है। भाव-केन्द्र यह है कि असली दर्शन अंतर्दृष्टि से मिलता है।
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टैग्ज़: तसव्वुफ़और 2 अन्य
दीदार की तलब के तरीक़ों से बे-ख़बर
दीदार की तलब है तो पहले निगाह माँग
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टैग्ज़: दीदारऔर 1 अन्य
सुना है हश्र में हर आँख उसे बे-पर्दा देखेगी
मुझे डर है न तौहीन-ए-जमाल-ए-यार हो जाए
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टैग्ज़: दीदारऔर 1 अन्य
मिरा जी तो आँखों में आया ये सुनते
कि दीदार भी एक दिन आम होगा
Interpretation:
Rekhta AI
यह दोहा-सा भाव बताता है कि लंबे इंतज़ार के बाद आशा की खबर सुनकर मन रो पड़ता है। “मन का आँखों में आना” का अर्थ है भावनाएँ आँसुओं बनकर आँखों तक आ जाना। यहाँ दुर्लभ दर्शन के आम हो जाने की बात, बिछोह के दुख के सामने मिलन की उम्मीद को उजागर करती है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह दोहा-सा भाव बताता है कि लंबे इंतज़ार के बाद आशा की खबर सुनकर मन रो पड़ता है। “मन का आँखों में आना” का अर्थ है भावनाएँ आँसुओं बनकर आँखों तक आ जाना। यहाँ दुर्लभ दर्शन के आम हो जाने की बात, बिछोह के दुख के सामने मिलन की उम्मीद को उजागर करती है।
कासा-ए-चश्म ले के जूँ नर्गिस
हम ने दीदार की गदाई की
Interpretation:
Rekhta AI
मीर तक़ी मीर ने आँखों को भिक्षा-पात्र की तरह दिखाया है, और नरगिस का कटोरे जैसा रूप इस बिंब को मजबूत करता है। यहाँ दर्शन कोई अधिकार नहीं, बल्कि दान की तरह माँगा गया है। भाव में विनम्रता, बेबसी और तीव्र चाह एक साथ बहती है।
Interpretation:
Rekhta AI
मीर तक़ी मीर ने आँखों को भिक्षा-पात्र की तरह दिखाया है, और नरगिस का कटोरे जैसा रूप इस बिंब को मजबूत करता है। यहाँ दर्शन कोई अधिकार नहीं, बल्कि दान की तरह माँगा गया है। भाव में विनम्रता, बेबसी और तीव्र चाह एक साथ बहती है।
फ़रेब-ए-जल्वा कहाँ तक ब-रू-ए-कार रहे
नक़ाब उठाओ कि कुछ दिन ज़रा बहार रहे
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टैग्ज़: तसव्वुफ़और 1 अन्य