ख़ामोशी पर 20 बेहतरीन शेर
ख़ामोशी को मौज़ू बनाने
वाले इन शेरों में आप ख़ामोशी का शोर सुनेंगे और देखेंगे कि अलफ़ाज़ के बेमानी हो जाने के बाद ख़ामोशी किस तरह कलाम करती है। हमने ख़ामोशी पर बेहतरीन शायरी का इन्तिख़ाब किया है इसे पढ़िए और ख़ामोशी की ज़बान से आगाही हासिल कीजिए।
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हम लबों से कह न पाए उन से हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामुशी क्या चीज़ है
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ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है
तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है
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टैग: ख़ामोशी
चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़
तस्वीर-ए-यार को है मिरी गुफ़्तुगू पसंद
Interpretation:
Rekhta AI
कवि जुदाई की रात में अकेला है और एक तस्वीर से बातें कर रहा है, मानो वह सजीव हो। “रात” को चुप श्रोता और “तस्वीर” को साथी बनाकर वह अपनी तड़प और खालीपन दिखाता है। प्रिय के न होने पर याद और कल्पना ही उसके संवाद का सहारा बन जाती है।
Interpretation:
Rekhta AI
कवि जुदाई की रात में अकेला है और एक तस्वीर से बातें कर रहा है, मानो वह सजीव हो। “रात” को चुप श्रोता और “तस्वीर” को साथी बनाकर वह अपनी तड़प और खालीपन दिखाता है। प्रिय के न होने पर याद और कल्पना ही उसके संवाद का सहारा बन जाती है।
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टैग: तस्वीर
हर तरफ़ थी ख़ामोशी और ऐसी ख़ामोशी
रात अपने साए से हम भी डर के रोए थे
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असर भी ले रहा हूँ तेरी चुप का
तुझे क़ाइल भी करता जा रहा हूँ
Interpretation:
Rekhta AI
कवि मानता है कि सामने वाले की चुप्पी खाली नहीं है; वह दिल पर चोट करती है। लेकिन वह हार नहीं मानता और लगातार समझाकर, मनाकर उसे राज़ी करने की कोशिश करता रहता है। यहाँ दर्द और जिद दोनों साथ चलते हैं—चुप्पी से चोट भी लगती है और कोशिश भी नहीं रुकती। भाव यही है कि दूरी के बावजूद चाह बनी रहती है।
Interpretation:
Rekhta AI
कवि मानता है कि सामने वाले की चुप्पी खाली नहीं है; वह दिल पर चोट करती है। लेकिन वह हार नहीं मानता और लगातार समझाकर, मनाकर उसे राज़ी करने की कोशिश करता रहता है। यहाँ दर्द और जिद दोनों साथ चलते हैं—चुप्पी से चोट भी लगती है और कोशिश भी नहीं रुकती। भाव यही है कि दूरी के बावजूद चाह बनी रहती है।
रंग दरकार थे हम को तिरी ख़ामोशी के
एक आवाज़ की तस्वीर बनानी थी हमें
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ख़ामुशी तेरी मिरी जान लिए लेती है
अपनी तस्वीर से बाहर तुझे आना होगा
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