Tahzeeb Hafi's Photo'

नई नस्ल के अग्रणी शायर।

नई नस्ल के अग्रणी शायर।

ग़ज़ल 15

नज़्म 1

 

शेर 16

मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ

पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे

तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया

इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

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ये एक बात समझने में रात हो गई है

मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है

वीडियो 9

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
At a Hyderabad mushaira

तहज़ीब हाफ़ी

Reciting his own poetry

तहज़ीब हाफ़ी

Sham e Ghazal Chowk Qureshi Muzaffargarh

तहज़ीब हाफ़ी

इक तिरा हिज्र दाइमी है मुझे

तहज़ीब हाफ़ी

इन्फ्लुएँजा से क्रोना तक

कितना अर्सा लगा ना-उमीदी के पर्बत से पत्थर हटाते हुए तहज़ीब हाफ़ी

किसे ख़बर है कि उम्र बस उस पे ग़ौर करने में कट रही है

तहज़ीब हाफ़ी

पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा

तहज़ीब हाफ़ी

बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता

तहज़ीब हाफ़ी

सहरा से आने वाली हवाओं में रेत है

तहज़ीब हाफ़ी

ऑडियो 3

तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया

पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा

ये एक बात समझने में रात हो गई है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

 

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