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अभिनंदन पांडे

1988 | दिल्ली, भारत

नई पीढ़ी के अहम शायरों में शामिल

नई पीढ़ी के अहम शायरों में शामिल

अभिनंदन पांडे

ग़ज़ल 8

अशआर 4

ग़ौर से देखते रहने की सज़ा पाई है

तेरी तस्वीर इन आँखों में उतर आई है

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नस्ल-ए-आदम रफ़्ता रफ़्ता ख़ुद को कर लेगी तबाह

इतनी सख़्ती से क़यामत पेश आएगी पूछ

सवाल गए आँखों से छिन के होंटों पर

हमें जवाब देने का फ़ाएदा तो मिला

दरमियाँ जो जिस्म का पर्दा है कैसे होगा चाक

मौत किस तरकीब से हम को मिलाएगी पूछ

चित्र शायरी 1

 

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