Kishwar Naheed's Photo'

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

किश्वर नाहीद

ग़ज़ल 58

नज़्म 23

अशआर 10

कुछ दिन तो मलाल उस का हक़ था

बिछड़ा तो ख़याल उस का हक़ था

दिल को भी ग़म का सलीक़ा था पहले पहले

उस को भी भूलना अच्छा लगा पहले पहले

हमें देखो हमारे पास बैठो हम से कुछ सीखो

हमीं ने प्यार माँगा था हमीं ने दाग़ पाए हैं

दिल में है मुलाक़ात की ख़्वाहिश की दबी आग

मेहंदी लगे हाथों को छुपा कर कहाँ रक्खूँ

  • शेयर कीजिए

जवान गेहूँ के खेतों को देख कर रो दें

वो लड़कियाँ कि जिन्हें भूल बैठीं माएँ भी

बच्चों की कहानी 6

दोहा 7

आँख की पुतली सब कुछ देखे देखे अपनी ज़ात

उजला धागा मैला होवे लगें जो मैले हात

  • शेयर कीजिए

मैं बहरी थी कागा बोला सुन सकी संदेश

दिल कहता है कल आएँगे पिया बदल के भेस

  • शेयर कीजिए

सूत के कच्चे धागे जैसे रिश्ते पर इतराऊँ

साजन हाथ भी छू लें तो मैं फूल गुलाब बन जाऊँ

  • शेयर कीजिए

प्रेम किया और साथ छोटा कैसे थे वो लोग

हम ने प्यारों का अब तक देखा संजोग

  • शेयर कीजिए

तकिया भीगा साँस भी डूबी मुरझाई हर आस

दिल को राह पे लाने की हर आस बनी संयास

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 29

वीडियो 27

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

किश्वर नाहीद

"Tum Swami Raam Bane Mere"

Noted feminist Urdu poet Kishwar Nahid who is commonly known for her bold and radical views for highlighting the issues of women and their plight in the present male dominant society through her poetry, is at Rekhta studio. किश्वर नाहीद

"Wo Jo Bachchiyon Se Bhi Dar Gaye"

Noted feminist Urdu poet Kishwar Nahid who is commonly known for her bold and radical views for highlighting the issues of women and their plight in the present male dominant society through her poetry, is at Rekhta studio. किश्वर नाहीद

Kishwar Naheed at Mushaira

किश्वर नाहीद

Kishwar Nahid - Woh Ajnabi Tha Ghair Tha Kisne Kaha Na Tha

Noted feminist Urdu poet Kishwar Nahid who is commonly known for her bold and radical views for highlighting the issues of women and their plight in the present male dominant society through her poetry, is at Rekhta studio. किश्वर नाहीद

assi buriya'n ve loko

किश्वर नाहीद

उम्र में उस से बड़ी थी लेकिन पहले टूट के बिखरी मैं

किश्वर नाहीद

एक ही आवाज़ पर वापस पलट आएँगे लोग

किश्वर नाहीद

ऐ रह-ए-हिज्र-ए-नौ-फ़रोज़ देख कि हम ठहर गए

किश्वर नाहीद

ख़ुदाओं से कह दो

जिस दिन मुझे मौत आए किश्वर नाहीद

गिलास लैंडस्केप

अभी सर्दी पोरों की पहचान के मौसम में है किश्वर नाहीद

घास तो मुझ जैसी है

घास भी मुझ जैसी है किश्वर नाहीद

ज़ेहन रहता है बदन ख़्वाब के दम तक उस का

किश्वर नाहीद

तुझ से वादा अज़ीज़-तर रक्खा

किश्वर नाहीद

तिरे क़रीब पहुँचने के ढंग आते थे

किश्वर नाहीद

दिल को भी ग़म का सलीक़ा न था पहले पहले

किश्वर नाहीद

बिगड़ी बात बनाना मुश्किल बड़ी बात बनाए कौन

किश्वर नाहीद

मुझे भुला के मुझे याद भी रखा तू ने

किश्वर नाहीद

मिरी आँखों में दरिया झूलता है

किश्वर नाहीद

विदा करता है दिल सतवत-ए-रग-ए-जाँ को

किश्वर नाहीद

वो अजनबी था ग़ैर था किस ने कहा न था

किश्वर नाहीद

वो अजनबी था ग़ैर था किस ने कहा न था

किश्वर नाहीद

सोने से पहले एक ख़याल

मुझे नवम्बर की धूप की तरह मत चाहो किश्वर नाहीद

हम गुनहगार औरतें

ये हम गुनहगार औरतें हैं किश्वर नाहीद

हवा कुछ अपने सवाल तहरीर देखती है

किश्वर नाहीद

ऑडियो 25

उम्र में उस से बड़ी थी लेकिन पहले टूट के बिखरी मैं

एक ही आवाज़ पर वापस पलट आएँगे लोग

ख़ुश्बू को रंगतों पे उभरता हुआ भी देख

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित ब्लॉग

 

संबंधित शायर

"इस्लामाबाद" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

GET YOUR FREE PASS
बोलिए